Wednesday, June 3, 2015


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Mata-Pita ka Baccho ke saath khelna, Raah jeene ki sikhana, Sab baste ke niche dab gaya, Jindgi ki race me baccho ka 'BACHPAN' kho gaya. 
माता-पिता का बच्चोँ के साथ खेलना, राह जीने की सिखाना, सब बस्ते के नीचे दब गया, जिन्दगी की रेस मेँ बच्चोँ का 'बचपन' खो गया।

19 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

सही बात :)

हिमकर श्याम said...

बिलकुल सही कहा

कहकशां खान said...

बहुत ही अच्‍छी पोस्‍ट।

विकेश कुमार बडोला said...

सच में बच्‍चों को देखकर तरस आता है। इन्‍हें बचपन को जीने लायक स्थितियां उपलब्‍ध नहीं हो पा रही हैं।

Mithilesh dubey said...

बिलकुल सही कहा आपने।

JEEWANTIPS said...

विकेश जी,
बिल्कुल सही कहा आपने

JEEWANTIPS said...

सुन्दर व सार्थक प्रस्तुति..
शुभकामनाएँ।

Sanju said...

Bachpan bahut amulya hota hai.

Shanti Garg said...

सुन्दर व सार्थक प्रस्तुति..
शुभकामनाएँ।

JEEWANTIPS said...

सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार...

Virendra Kumar Sharma said...

True our children are growing today under the baggage of their parents ambitions .

कहकशां खान said...

वाह, बहुत खूब। जिंदगी की रेस में रिश्‍ते पीछे न छूट जाएं हमें इसका जरूर ध्‍यान रखना चाहिए।

Best Online Shopping Sites said...

बिलकुल सही कहा

rudraprayaga said...

vakayi yehee hota hein. achchaa vichaar. Do you know Malayalam?

sm said...

beautifully said

savan kumar said...

सत्य वचन
http://savanxxx.blogspot.in

Smart Indian said...

सही है।

संजय भास्‍कर said...

वाह, बहुत खूब

Chimmiii's Happy World said...

Beautiful blog :)