Monday, May 30, 2016



~::~                                     ~::~
Hothon pe ulfat k fasane nahi ate,
Jo beet gaye fir wo zamane nahi ate.
Dost hi hote hain dosto ke humdard,
Koi farishte yahan sath nibhane nahi aate..


होंठों पे उल्फत के फ़साने नहीं आते
जो बीत गये फिर वो ज़माने नहीं आते
दोस्त ही होते हैं दोस्तों के हमदर्द
कोई फ़रिश्ते यहाँ साथ निभाने नहीं आते

7 comments:

JEEWANTIPS said...

बहुत ही अच्छी रचना ....

Kavita Rawat said...

होंठों पे उल्फत के फ़साने नहीं आते
जो बीत गयी फिर वो ज़माने नहीं आते
दोस्त ही होते हैं दोस्तों के हमदर्द
कोई फ़रिश्ते यहाँ साथ निभाने नहीं आते

वाह! वह! बहुत सुन्दर !

Sanju said...

Kavita ji,
blog par aakar apne vichaar vyakt karne ke liye Thanks.

Shanti Garg said...

दोस्त और उसकी दोस्ती ऐसी ही होती है।

savan kumar said...

अच्छी शब्द रचना
http://savanxxx.blogspot.in

Pammi said...

खुबसूरत शब्द रचना।

Swad Sehat said...

जो बीत गये वो जमाने नही आते....बिल्कुल सही।